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Holi 2021: होलिका दहन के अगले दिन को क्यों कहा जाता है धुलेंडी, जानिए यहां

By समाजसेवी वनिता कासनियां पंजाब//
हिंदू धर्म में पर्व त्योहारों को विशेष महत्व दिया जाता हैं वही होली का त्योहार पूरे देश में धूमधाम के साथ मनाया जाता हैं लोग एक दूसरे पर अबीर गुलाल और रंग डालते हैं यह पर्व उमंग और उल्लास को दर्शाता है। प्रत्यके वर्ष फाल्गुन मास की पूर्णिमा तिथि को होलिका दहन किया जाता है और उसके अगले दिन कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि को रंग वाली होली मनाई जाती हैंimage इस बार 28 मार्च को ​होलिका दहन किया जाएगा और 29 मार्च 2021 को होली का त्योहार मनाया जाएगा। जिसे रंग वाली होली या धुलेंडी कहा जाता हैं मगर आज हम आपको रंग वाली होली को धुलेंडी क्यों कहा जाता हैं और यह परंपरा कब से आरंभ हुई हैं इसके बारे में बता रहे हैं तो आइए जानते हैं।
होलिका दहन के अगले दिन धुलेंडी मनाई जाती हैं इस दिन लोग जमकर पानी और रंगों से होली खेलते हैं धुलेंडी को धुरड्डी, धुरखेल, धूलिवंदन और चैत बदी आदि नामों से जाना जाता हैं आज के समय में धुलेंडी का पर्व एक दूसरे पर रंग और अबीर गुलाल डालकर मनाया जाता हैंimage मगर पहले के समय में धुलेंडी का पर्व बहुत ही अलग तरह से होता हैं उसी परंपरा के नाम पर इस दिन को धुलेंडी कहा जाता हैं मान्यताओं के मुताबिक त्रेतायुग के आरंभ में श्री विष्णु ने धूलि वंदन किया था। तभी से इस दिन धूलिवंदन यानी एक दूसरे पर धूल लगाने की परंपरा शुरू हुई। एक दूसरे पर धूल लगाने के कारण ही इस दिन को धुलेंडी भी कहा जाता हैं।image
वही पुराने समय में लोग जब एक दूसरे पर धूल लगाते थे तो उसे धूलि स्नान कहा जाता था। आज भी कुछ जगहों पर खासतौर पर गांवों में लोग एक दूसरे को धूल आदि लगाते हैं पहले के समय में लोग शरीर पर चिकनी या मुल्तानी मिट्टी भी लगाया करते थे।image इसके अलावा पहले के समय में इस दिन धूल के साथ टेसू के पुष्पों के रस से बने हुए रंग का प्रयोग किया जाता था और रंगपचंमी पर अबीर गुलाल से होली खेली जाती थी। वर्तमान समय में धुलेंडी का रूप बदल गया और लोग इस दिन भी रंगपंचमी के उत्सव की तरह ही रंगों से उत्सव मनाते हैं।image

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